मंगोल लिपि
मंगोल लिपि में गुयुक ख़ान का सन् १२४६ का राजचिह्न
चित्र:Gaykhatu coin with Khagan's name.jpg
इस सिक्के पर मंगोल लिपि में लिखा है कि यह 'रिन्छिन्दोर्जी गएख़ातू ने ख़ागान के नाम पर ज़र्ब किया'
मंगोल लिपि (मंगोल: ᠮᠣᠩᠭᠣᠯ ᠪᠢᠴᠢᠭ᠌, सिरिलिक लिपि: Монгол бичиг, मोंगयोल बिचिग), जिसे उईग़ुरजिन भी कहते हैं, मंगोल भाषा को लिखने की सर्वप्रथम लिपि और वर्णमाला थी। यह उईग़ुर भाषा के लिए प्रयोग होने वाली प्राचीन लिपि को लेकर विकसित की गई थी और बहुत अरसे तक मंगोल भाषा लिखने के लिए सब से महत्वपूर्ण लिपि का दर्जा रखती थी।[1] सन् १६४६ में रूसी प्रभाव से मंगोल लिखने के लिए सिरिलिक लिपि का इस्तेमाल शुरू हो गया और धीरे-धीरे मोंगोल लिपि का प्रयोग ख़त्म होता चला गया। मूल रूप से मंगोल लिपि में शब्दों को ऊपर से नीचे लिखा जाता था, लेकिन आधुनिक युग में इसको अक्सर बाएँ-से-दाएँ लिखा जाने लगा है। कुछ अन्य भाषाओँ ने भी मंगोल लिपि को लेकर उस पर अपनी लिपियों को आधारित किया। इसकी एक बड़ी मिसाल मान्छु भाषा है जिसकी मान्छु लिपि इसी मंगोल लिपि पर आधारित थी। इसके अलावा शिबे (जो चीन के सुदूर-पश्चिम शिनजियांग प्रांत में बोली जाती है), ओइरत और एवेंकी ने भी अपनी लिपियाँ मंगोल लिपि से बनाई।
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